आइन्स्टीन के सापेक्षता के सिद्दांत के अनुसार चुकी प्रकाश की गति नियत है ,और न्यू टन के नियम से वस्तुओं के बीच दूरी हमेशा सापेक्ष ही होती है अतएव ब्रम्हांड में घटनाओं का समय हमेशा एक दुसरे के सापेक्ष ही होगा ।
अतएव प्रकाश की गति ही वह घटक है जिसकी वजह से समय को परिभाषित किया जा सका है।
अतएव ब्रम्हांडीय पिंडों के पास से गुजरते समय दिक्-कल में प्रकाश विचलित होगा अतएव समय भी विचलित होगा।
एक दूसरी बात ,अगर हम यह मानते है की हम कभी समय में गति कर सकेंगे तो भविष्य से लोग हमारे समय में क्यों नही आते .हो सकता है की वे आते हो और चूँकि वे समय को प्रभावित नही कर सकते और इसीलिए वे हमरे साथ बात नही कर सकते अतएव ऐसा हो सकता है की वे हमें देख सकते हो किंतु हम उन्हें नही देख सकते हों।
लेकिन इसका मतलब यह हुआ की हम सब भूतकाल ,वर्तमान व भविष्य में एक साथ अस्तित्व रखते हैं ।
और हर घटना एक शंकु की तरह आगे बढती है जो अपनी पिछली घटना का परिणाम होती है। अतएव सभी घटनाओं का एक निश्चित जाल बना हुआ है। और इसका मतलब यह हुआ की ब्रह्माण्ड एक गोला न होकर एक शंकु है ,जो निरंतर फ़ैल रहा है।
आप ने गोले को शंकु बना दिया। लेकिन यह अवधारणा ही तो है।
जवाब देंहटाएंनिश्चित रूप से ,अगर हम समय में हर जगह हैं !तो समय एक शंकुल ब्रह्माण्ड होगा !
जवाब देंहटाएंI think when a watch will go into blackhole then it will not destroyed completely till it enters the black hole but after entering into that there will not be negative time because this means that black holes still follows the physical laws that exist outside the black hole through in negative direction.In black hole all physical laws and dimensions are destroyed thus we can not say anything about fourth dimension which is 'time'.
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